‘दमन’ की चाशनी में लपेटे चैनल ऑस्ट्रेलिया में तमाम अखबारों ने सरकारी सेंसरशिप की खिलाफत करते हुए सोमवार को फ्रंट पेज काले कर दिए. भारत में भी ऐसा हुआ था जब 26 जून 1975 को इंदिरा गांधी ने आपातकाल का ऐलान कर दिया था. आपातकाल में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर रोक का प्रतीकात्मक विरोध करते हुए कुछ अखबारों ने फ्रंट पेज काले कर दिए थे. मुङो लगता है कि मीडिया पर सरकारी अंकुश का मुद्दा विश्वव्यापी है. अमेरिका में ट्रम्प साहब के खिलाफ बोलना और लिखना यानी मुसीबत ओढ़ लेने के समान है. फिर भी कुछ अखबार और चैनल हैं जो राष्ट्रपति ट्रम्प को हकीकत से रू-ब-रू कराकर उन्हें आईना दिखाते रहते हैं. दरअसल दुनिया में मीडिया का दमन दो तरह से हो रहा है. एक-जैसा ऑस्ट्रेलिया में हुआ. अखबारों पर सेंसरशिप लगाकर उसकी जुबान काट दो. लठ लेकर या हथियार चलाकर मीडिया का मुंह बंद कर दो और दूसरा तरीका है मीडिया को खरीद लो. इतना पैसा फेंको कि खासकर खबरिया चैनल दौलत की चमचमाहट के आगे अपने फर्ज को भुलाकर हुकूमत के आगे पालतू कुत्ते की तरह दुम हिलाते बैठे रहे. भारत में मीडिया के दमन का दूसरा तरीका आजमाया जा रह...