इश्तहार फंडा
टीवी पर दिखाए जा रहे इश्तेहारों की गोलमोल भाषा और उनका प्रस्तुतिकरण अक्सर ललचाने वाला होता है। चूहा मारने की दवा भी इश्तेहार में ऐसी दिखाई जाती है जैसे बहुत आला दर्जे का उत्पाद बेच रहे हो। दवा आपके घर खाकर चूहे बाहर जाकर मरेंगे...क्या चूहों को पता है कि बाहर जाकर मरना है? या दवा उन्हें बाहर जाकर मरने के लिए प्रेरित कर रही है...ऐसे दावों पर भरोसा हम कर भी लेते हैं ...और कालों को गोरा बनानेवाली दर्जनों फेयरनेस क्रीम की तो बात ही मत कीजिये। हर क्रीम को इस तरह से पेश किया जाता है गोया इसे चहरे पर मलने से 'सफेदी की चमकार' निकलेगी। बहुत पुराना मामला है। एक बहुचर्चित और सर्वाधिक बिकने का दावा करनेवाली फेयरनेस क्रीम के खिलाफ मुकदमा हो गया था। क्रीम के इश्तेहार में दिखाया गया था कि एक लड़की को एयर होस्टेस की नौकरी इसलिए नकार दी जाती है क्योंकि वह सांवली है। फिर यह लड़की बहुचर्चित फेयरनेस क्रीम का प्रयोग करके गोरी हो जाती है और उसे एयर होस्टेस का जॉब मिल जाता है। इस इश्तेहार से यह संदेश जा रहा था कि गोरे लोग ही सफलता के सोपान चढ़ने में सक्षम हैं और काले तो एकदम निकम्मे। सत्य इसके विपरीत...