‘यम’ बन गया नियम
शर्तियां..न्यूजीलैंड के लिए नियम ही ‘यम’ बन गया. एक सुचारू व्यवस्था कायम करने के लिए, मूल्यों का पालन करने के लिए किसी शीर्ष संस्था या समाज द्वारा नियमावली बनाई जाती है.किंतु नियमावली भी गले की जंजीर बन सकती है. जिन नियमों को प्रचलित व्यवस्था में सुचारूपन लाने के लिए गढ़ा जाता है, वही गाड़ने का काम कर देते हैं, जैसा न्यूजीलैंड के साथ हुआ. बेचारे कीवी 2015 में भी फाइनल में पहुंचे थे. तब कंगारुओं ने उन्हें पीट दिया. 2019 में भी फाइनल में पहुंचे और कप के करीब बढ़ ही रहे थे कि क्रिकेट का एक नियम रास्ते में ‘यम’ बनकर खड़ा हो गया..और नियम क्या कहता है कि फाइनल मुकाबला यदि सुपर ओवर में भी टाई हो जाता है तो दोनों टीमों के चौकौं-छक्कों को गिनकर चैंपियन का फैसला किया जाए. सुपर ओवर से पहले कीवी जीत रहे थे तो मार्टिन गुप्टिल का थ्रो स्टोक्स के बल्ले से छटकर गेंद सीमा पर चली गई. इसलिए सुपर ओवर की नौबत आन पड़ी. सुपर ओवर में भी टाई करा बैठे तो चौके-छक्कों की तादाद गिनने के नियम ने फटे में टांग डाल दी. जिन महानुभावों ने इस नियम को बनाया है लगता है उन्होंने दूर तक सोचा ही नहीं होगा. उन्हें इल्म भी नहीं रहा होगा कि विश्व कप के फाइनल में सुपरओवर भी हो सकता है और हुआ तो वहां भी टाई हो जाएगा. उन्होंने यही सोचा होगा ‘बना डालो एक नियम..यार फाइनल मैच इतनी दूर थोड़े ही जा सकता है.’
इंग्लैंड की तरह न्यूजीलैंड ने भी मेहनत की. सबकुछ दांव पर लगा दिया लेकिन पेंच अंत में फंसा तो बाउंड्रियों की गिनती पर, जिसमें कीवी पिछड़ गए. बस इतनी सी बात पर कप ले गए गोरे. इससे यह भी जरूरी हो गया है कि पहले बल्लेबाजी कर चुकी टीम के चौके-छक्कों पर भी गौर करों और खेलो. वरना सुपर ओवर आ गया तो गए बारह के भाव में. यानी टीम के स्टैटिस्टिशियन के पीछे चौके-छक्के की गिनती करने का भी काम लग गया. बहरहाल, जिस तरह से इस ‘फालतू’ नियम के आलोचनाओं का दौर चल रहा है लगता नहीं आईसीसी इसका वजूद लंबे समय तक रखेगी. क्रिकेट की शीर्ष परिचालन संस्था ‘यम’ बने इस नियम को जल्द से जल्द अलविदा कर कोई विकल्प खोज सकती है और उसे करना ही होगा. क्योंकि पांच महीनों बाद (जनवरी में) ऑस्ट्रेलिया में टी-20 विश्व कप है. वहां अगर आईसीसी ने इस ‘यम’ को लेकर काम किया तो उसी के लिए मुश्किल हो जाएगा. ज्यो भी हो, विश्व कप क्रि केट के 44 साल के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ जब एक देश बगैर जीते चैंपियन बना जबकि दूसरा बगैर हारे उपविजेता रहा. वाह रे क्रि केट .तू.बड़ा क्रूर है, मगर तेरी क्रूरता ही सुंदरता है और सारा जहां इसी की बदौलत तेरा दीवाना है. तुङो सलाम..
शर्तियां..न्यूजीलैंड के लिए नियम ही ‘यम’ बन गया. एक सुचारू व्यवस्था कायम करने के लिए, मूल्यों का पालन करने के लिए किसी शीर्ष संस्था या समाज द्वारा नियमावली बनाई जाती है.किंतु नियमावली भी गले की जंजीर बन सकती है. जिन नियमों को प्रचलित व्यवस्था में सुचारूपन लाने के लिए गढ़ा जाता है, वही गाड़ने का काम कर देते हैं, जैसा न्यूजीलैंड के साथ हुआ. बेचारे कीवी 2015 में भी फाइनल में पहुंचे थे. तब कंगारुओं ने उन्हें पीट दिया. 2019 में भी फाइनल में पहुंचे और कप के करीब बढ़ ही रहे थे कि क्रिकेट का एक नियम रास्ते में ‘यम’ बनकर खड़ा हो गया..और नियम क्या कहता है कि फाइनल मुकाबला यदि सुपर ओवर में भी टाई हो जाता है तो दोनों टीमों के चौकौं-छक्कों को गिनकर चैंपियन का फैसला किया जाए. सुपर ओवर से पहले कीवी जीत रहे थे तो मार्टिन गुप्टिल का थ्रो स्टोक्स के बल्ले से छटकर गेंद सीमा पर चली गई. इसलिए सुपर ओवर की नौबत आन पड़ी. सुपर ओवर में भी टाई करा बैठे तो चौके-छक्कों की तादाद गिनने के नियम ने फटे में टांग डाल दी. जिन महानुभावों ने इस नियम को बनाया है लगता है उन्होंने दूर तक सोचा ही नहीं होगा. उन्हें इल्म भी नहीं रहा होगा कि विश्व कप के फाइनल में सुपरओवर भी हो सकता है और हुआ तो वहां भी टाई हो जाएगा. उन्होंने यही सोचा होगा ‘बना डालो एक नियम..यार फाइनल मैच इतनी दूर थोड़े ही जा सकता है.’
इंग्लैंड की तरह न्यूजीलैंड ने भी मेहनत की. सबकुछ दांव पर लगा दिया लेकिन पेंच अंत में फंसा तो बाउंड्रियों की गिनती पर, जिसमें कीवी पिछड़ गए. बस इतनी सी बात पर कप ले गए गोरे. इससे यह भी जरूरी हो गया है कि पहले बल्लेबाजी कर चुकी टीम के चौके-छक्कों पर भी गौर करों और खेलो. वरना सुपर ओवर आ गया तो गए बारह के भाव में. यानी टीम के स्टैटिस्टिशियन के पीछे चौके-छक्के की गिनती करने का भी काम लग गया. बहरहाल, जिस तरह से इस ‘फालतू’ नियम के आलोचनाओं का दौर चल रहा है लगता नहीं आईसीसी इसका वजूद लंबे समय तक रखेगी. क्रिकेट की शीर्ष परिचालन संस्था ‘यम’ बने इस नियम को जल्द से जल्द अलविदा कर कोई विकल्प खोज सकती है और उसे करना ही होगा. क्योंकि पांच महीनों बाद (जनवरी में) ऑस्ट्रेलिया में टी-20 विश्व कप है. वहां अगर आईसीसी ने इस ‘यम’ को लेकर काम किया तो उसी के लिए मुश्किल हो जाएगा. ज्यो भी हो, विश्व कप क्रि केट के 44 साल के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ जब एक देश बगैर जीते चैंपियन बना जबकि दूसरा बगैर हारे उपविजेता रहा. वाह रे क्रि केट .तू.बड़ा क्रूर है, मगर तेरी क्रूरता ही सुंदरता है और सारा जहां इसी की बदौलत तेरा दीवाना है. तुङो सलाम..

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