मोटे हैं तो क्या हुआ..

रखिम कॉर्नवॉल कोई ऐसा-वैसा क्रिकेटर नहीं है बल्कि ‘असाधारण’ है. भारत के खिलाफ शुक्रवार से जमैका में आरंभ दूसरे टेस्ट मैच में इस कैरिबियाई क्रिकेटर ने अपने टेस्ट जीवन का शुभारंभ किया. यही समझ में नहीं आ रहा कि रखिम क्रिकेटर कैसे बन गया. उसका कद है साढ़े छह फिट का और वजन है 315 पाउंड मतलब 143 किलो. इंसानी स्वास्थ्य के संबंध में कद और वजन (बॉडी मास इंडेक्स) के जो मानदंड निर्धारित है उसमें यह बंदा कहीं फिट नहीं है. रखिम का कद यदि 6.5 फिट का है तो उसका वजन मानदंडों के तहत 156 से 204 पौंड ( 70 से 93 किलो) के बीच चाहिए पर यह भीमकाय इंसान है 245 पाउंड का जो ओवरवेट की रेखा से भी करीब 70 पौंड (31 किलो) अधिक.  रखिम की पर्सनालिटी को देखते हुए उसे तो डब्ल्यूडब्ल्यूएफ का पहलवान होना चाहिए था लेकिन बन गया क्रिकेटर. रखिम को तो सलाम करने को जी चाहता.  यह बंदा उन तमाम भारतीयों के लिए एक नजीर है जो स्लिम बॉडी के क्रेजी है. दुबला-पतला बने रहने के लिए दिन-रात हाड़तोड़ मेहनत करते हैं. सपाट पेट, सिक्स पैक के लिए खाने से तौबा करते हैं. जब खूब पसीना बहाने के बाद भी बदन दुबला नहीं होता, पेट सपाट नहीं होता तो दवाइयों के डोज  लिए जाते हैं और कुछ इसमें मर भी जाते हैं. पता नहीं भारत में दुबले बने रहने का, जीरो फिगर का बेढंगा क्रेज, संक्रमण आया कहां से. बॉलीवुड की हीरोइनों को देखो तो तितलीनुमा लगती हैं. किसी के गाल की हड्डियां बाहर आई हैं तो, किसी की कमर लगभग गायब है. हालांकि मेकअप असलियत को छुपा देता है. कोई हीरोइन अगर मांसल है तो ट्रोल होने लगती हैं. परिणिता चोपड़ा, हुमा कुरैशी, विद्या बालन को उनके मांसल जिस्म के लिए पता नहीं कितनों ने सोशल साइट्स पर ट्रोल कर दिया. ऐसा मिजाज शायद बॉलीवुड का ही है. दूसरी और हॉलीवुड की फिल्मों को देखिए. वहां तो दुबलेपन की कोई अवधारणा ही नहीं दिखती. हॉलीवुड ही क्यों भोजपुरी फिल्मों की हीरोइनों को देखिए. खूबसूरती और तंदुरुस्ती की बेहतरीन मिसाल लगती हैं. सो..दुबलेपन की सोच को लेकर जो प्रादुर्भाव इन दिनों हमारे यहां है उसे रखिम कॉर्नवॉल ने धक्का दिया है. कौन कहता है कि मोटा, थुलथुला इंसान सफल नहीं होता और वह भी ऐसे काम में जहां शरीर का ही उपयोग ज्यादा है. 

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