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  जिंदगी की आशा-निराशा का  खेल ‘पार’ अस्सी के दशक में भारतीय निर्देशकों की कुशलता और अदाकारों के जीवंत अभिनय से परिपूर्ण एक से बढ़कर एक कला फिल्मों का प्रसारण दूरदर्शन के राष्ट्रीय चैनल पर होता था. मुख्यधारा की फिल्मों से विलग कला फिल्मों के संसार से भारतीय दर्शकों को रू-ब-रू कराने का शानदार काम उस जमाने में दूरदर्शन ने किया. जनम, आधारशीला, पार, करंट, पार्टी, एक  रुका हुआ फैसला जैसी उच्चकोटि की कला फिल्में दूरदर्शन ने प्रसारित कर भारतीय मनोरंजन क्षेत्र के समृद्ध पक्ष को उजागर किया. इन सभी कला फिल्मों में मेरी पसंदीदी फिल्म थी ‘पार’. एक मजदूर की संघर्षपूर्ण जीवन गाथा का विवरण यानी ‘पार’ है. फिल्म के मुख्य किरदार नौरंगिया एवं उसकी पत्नी रमा के चरित्र को परदे पर साकार करने में क्रमश: नसरुद्दीन शाह तथा शबाना आजमी ने जान झोंक दी है. वहीं ओम पुरी ने गांव के प्रधान राम नरेश और उत्पल दत्त ने जमीदार के किरदार से संपूर्ण न्याय किया है.  फिल्म की पटकथा नौरंगिया और रमा के इर्दगिर्द है. बिहार में शोषित और दमित वर्ग का प्रतिनिधि मुसाहरा समाज का नौरंगिया स्वयं प्रगतिशील विचारों का ...