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अमेरिका और युद्ध का कारोबार

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दुनिया में शांति के लिए जंग की अवधारणा प्रस्तुत करता  पब्लियस फ्लेवियस वेजीटियस रेनाट्स का सदियों पुराना फलसफा  प्रभावित नहीं कर सकता।  अमन और युद्ध परस्पर विरोधी हैं। अमन जहां लोगों को जीने का हक देता है, हम सबकी जीवनधारा में प्रेम की मिशरी घोलता है, वहीं युद्ध का तात्पर्य विनाश है। चौथी-पांचवीं शताब्दी के रोमन लेखक और सैन्य विशेषज्ञ पब्लियस फ्लेवियस वेजीटियस रेनाट्स ने पता नहीं किस संदर्भ में अपनी किताब ‘डी रे मिलीटारी’ में  युद्ध और शांति को एक दूसरे की पूरक बता दिया लेकिन आगे चलकर यह वाक्यांश अमेरीकी फलसफा बना और अब जो हो रहा है  वह सब अमानवीय है। धन-दौलत, गजब की तकनीकी सुविधाएं और अत्याधुनिक हथियारों के बूते सर्वशक्तिमान अमेरिका कई देशों पर युद्ध लादकर विश्व को अस्थिर रखने का काम करता रहा है।  रेनाट्स ने तो शांति के लिए युद्ध की अवधारणाभर  दी लेकिन अवसरवादी अमेरिकी शासकों ने इसमें बाजार की भी अवधारणा  घुसाकर इसे परिष्कृत कर दिया। अमेरिका के लिए युद्ध अब उसके आयुध बेचने का विशाल ‘मॉल’ है। युद्ध का इतना शानदार व्यावसायिकरण और आयुधों का विपणन दु...