‘सरकशी’ का परचम लहराने का ‘सौतेला इनाम’?
‘सरकशी’ का तात्पर्य विद्रोह है, लेकिन यह भी न भूलें कि दुनिया में सामंतों की नींव हिला कर नई समतावादी व्यवस्था स्थापित करने की शक्ति भी ‘सरकशी’ में ही निहित है। भारतीय महिलाएं आज जिस कामयाबी के मुकाम पर हैं, वह इस विद्रोही चेतना की ही फलश्रुति है। भारतीय महिलाओं के संघर्ष की दास्तान काफी लंबी, मगर उतनी ही प्रेरक भी है। सावित्रीबाई फुले, सरोजिनी नायडू, फातिमा शेख, अहिल्याबाई होल्कर, एनी बेजेंट और इंदिरा गांधी ने तत्कालीन सामाजिक व्यवस्था को चुनौती देकर भारतीय नारियों में आत्मसम्मान की अलख जगाई। पितृसत्ता के खिलाफ विद्रोह का परचम थामने की ताकत नारी हाथों में उत्पन्न की और इतना ही नहीं, 21वीं सदी में उन्हें व्योम तक पहुंचा दिया। आज भारतीय महिलाओं की उपलब्धियों को उंगलियों पर नहीं गिना जा सकता। इसी कड़ी में एक और गौरवशाली अध्याय जुड़ा जब रविवार, दो नवंबर की रात भारत की महिला टीम आईसीसी वनडे विश्व कप स्पर्धा की विजेता बनी। यह उपलब्धि न तो रातों-रात मिली और न ही किसी परालौकिक शक्ति ने इसे थाली में सजाकर दे दिया। प्रदीर्घ संघर्ष गाथा इस ऐतिहासिक सफलता के पीछे भारतीय महिला टीम की लंबी संघर्ष...