शादी लड़के के घर लड़की की कोविड काल में इससे आदर्श विवाह शायद ही कोई हो, जिसका जिक्र मैं करने जा रहा हूं. बल्कि, सामान्य काल में भी इसे अनुकरणीय मानकर एक आदर्श विवाह संस्था के तौर पर स्थापित करने में कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए. गत वर्ष विवाह सुनिश्चित हुआ था लेकिन फिर कोविड के संक्रमण से दुनिया के चक्के जैसे थम गए. विवाह की तिथि टलती रही..टलती रही. अब जब स्थितियां सामान्य होने लगीं तो फिर नवीनतम तिथि निश्चित हुई लेकिन समस्या थी विवाह स्थल को लेकर. लड़की वाले नागपुर से बाहर के थे. विवाह तय करने के दौरान ही फैसला हुआ था कि शादी नागपुर में संपन्न कराई जाएगी. इस फैसले को बदलना मुमकिन नहीं हो रहा था. वधू पक्ष भी पसोपेश में था कि नागपुर में विवाह कहां कराए. कोविड का खौफ और साथ ही चुनिंदा निमंत्रितों की मेहमान नवाजगी पर लाखों लुटाना भी लड़कीवालों को नागवार गुजर रहा था इसलिए मंगल कार्यालय का विकल्प नापसंद था. अंतत: विवाह को लड़के के घर पर ही संपन्न कराने का विकल्प सामने आया. लड़कीवाले राजी हो गए. लड़की को लड़के के घर लाकर चुनिंदा लोगों के बीच सादगीपूर्ण विवाह रचाया गया. विवाह से पूर्व लड़...