एक और जंग की तैयारी, अब अंग्रेजों की बारी
जो खैरात में मिलती कामयाबी
तो हर शख्स कामयाब होता
फिर कदर न होती हुनर की
और न कोई शख्स लाजवाब होता
इन पंक्तियों के साथ ऑस्ट्रेलिया में भारतीय क्रिकेट टीम की असाधारण सफलता को सलाम और अब सामना है अंग्रेजों से. जो रूट की कमान में ‘साहब लोग’ भारत पहुंच गए हैं. एक और अत्यधिक रोमांचक शृंखला का इंतजार हम सभी को है.
तुलना
तुलनात्मत: दोनों टीमें शक्तिशाली हैं. भारत को लाभ घरेलू माहौल में खेलने का मिलेगा. हाल की बात करें तो भारत ने कंगारुओं को उन्हीं की सरजमी पर पटका, वहीं अंग्रेज भी श्रीलंकाई चितों को उन्हीं की मांद में रौंद कर आए हैं. यानी भारत और इंग्लैंड विदेशी सरजमी पर शृंखला जीते हैं. भारत ने ऑस्ट्रेलिया में वहां की तेज गेंदबाजों की मुफीद पिच पर शानदार प्रदर्शन किया तो इंग्लैंड ने भी श्रीलंका में स्पिनरों के लिए माकुल पिचों पर दमदार प्रदर्शन किया. ऑस्ट्रेलिया में भारतीय तेज गेंदबाजों का जलवा रहा तो श्रीलंका में अंग्रेज स्पिनर रंग में थे. कुल मिलाकर दोनों टीमें ताकत में समान हैं. विदेशी सरजमी पर फतह का सेहरा बांधने से दोनों के हौसले सातवें आसमान पर हैं.
कोहली बनाम रूट
भारत-इंग्लैंड शृंखला दुनिया के चार सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाजों में से दो विराट कोहली और जो रूट के बीच उत्कृष्टता की जंग भी होगी. विराट कोहली ने 87 टेस्ट मैचों में 53.42 की औसत से 7318 (27 शतक, सात दोहरे शतक) रन कूटे हैं, वहीं जो रूट ने 99 टेस्ट मुकाबलों में 49.1 की औसत से 8249 (19 शतक, चार दोहरे शतक) रन जुटाए हैं. यानी दो कप्तानों के आंकड़ों में भी बहुत ज्यादा अंतर नहीं है. दोनों कप्तानों के बीच जंग भी बेहद रोचक रहेगी. कोेहली हालांकि ऑस्ट्रेलिया दौरे से एक टेस्ट खेलने खेलने के बाद पितृत्व अवकाश पर भारत लौटे थे, वहीं रूट ने श्रीलंका में 426 रन बनाए. कप्तानी की बात करें तो कोहली ने 56 में से 33, जबकि रूट ने 46 में से 25 टेस्ट जीते हैं. यहां कोहली थोड़े आगे हैं.
दलबल
भारत और इंग्लैंड के पास उम्दा बल्लेबाज और उम्दा गेंदबाज भी हैं लेकिन मुख्यत: यह जंग दोनों टीमों के हरफनमौलाओं के बीच भी होगी. मेहमान टीम में मोईन अली, बेन स्टोक्स और क्रिस वोक्स हैं वहीं मेजबानों के पास हार्दिक पंड्या, रविचंद्रन अश्विन और वाशिंगटन सुंदर हैं. बल्लेबाजी में भारत के चेतेश्वर पुजारा, रोहित शर्मा और अजिंक्य रहाणे का अनुभव इंग्लैंड के जाक क्रॉले, डैनियल लॉरेंस और डॉमिनिक सिब्ले से कई ज्यादा है, पर तेज गेंदबाजी में मेहमानों के जिमी एंडरसन, क्रिस ब्रॉड और जोफ्रा आर्चर भारत के जसप्रीत बुमराह, मोहम्मद सिराज, ईशांत शर्मा, शार्दुल ठाकुर पर भारी लगते हैं. स्पिन विभाग में रविचंद्रन अश्विन, वाशिंगटन सुंदर, अक्षर पटेल का सामना डॉमिनिक बेस और जैक लीच से होगा.
भारत में पिचों स्पिनरों के पक्ष में बनाई गई तो एंडरसन और ब्रॉड के लिए चुनौती होगी. यह दोनों स्विंग के सरताज हैं और इंग्लैंड के मौसम में दोनों हर बल्लेबाज के लिए मुश्किल खड़ी करते हैं.
भारत को लाभ
भारत को घरेलू हालात का लाभ मिलेगा लेकिन पहले दो टेस्ट चेन्नई में खेले जानेवाले हैं जहां का मौसम कमोबेश श्रीलंका की तरह ही है जिसका उसीकी सरजमी पर सूपड़ा साफ करके इंग्लैंड की टीम आई है. अत: चेन्नई में मेहमानों को खुद को ढाल लेने में बहुत परेशानी नहीं होगी. इंग्लैंड की बल्लेबाजी का शीर्ष क्रम की अनुभवहीनता देखते हुए उसे यहां स्पिन फ्रेंडली पिचों पर परेशानी हो सकती है.
पिच लेगी परीक्षा
भारतीय खिलाड़ियों ने कोरोना काल के बाद आईपीएल खेला और फिर ऑस्ट्रेलिया का दौरा किया जहां तेज पिचें थीं. तकरीबन दो माह तक भारतीयों ने तेज पिचों पर अपने जौहर दिखाए. अब उन्हें यहां की धीमी पिचों पर उतरना होगा. पिचों की प्रकृति में इस बदलाव के अनुरूप शुरुआती मुकाबले में खुद को ढालना भारतीयों के लिए चुनौती होगी. दूसरी ओर श्रीलंका से लौटे इंग्लैंड के खिलाड़ियों के लिए पिच की प्रकृति परेशानी का सबब नहीं होनी चाहिए. क्योंकि भारत और श्रीलंका के बीच पिचें करीब-करीब एक जैसी हैं.

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