राफेल का निकल ही गया तेल

कश्मीर की खूबसूरत वादियों को बेकसूर नागरिकों और फौजियों के लहू से रंगने की दरिंदगी से दहशतगर्द बाज नहीं आ रहे हैं. ताजा मामला पुलवामा का है जहां जैश-ए-मोहम्मद ने हमला कर सीआरपीएफ के पचास के करीब जवानों को शहीद कर डाला. यह वक्त किसी विशिष्ट राजनीतिक दल या सियासी सूरत-ए-हाल को कोसने का कदापि नहीं है बल्कि उन परिवारों के साथ खड़े होने का है जिनके लाल दहशतगर्दो की घृणित और कायराना हरकत का शिकार बने. मगर इस हमले के कुछ परिणाम आनेवाले समय में सामने आएंगे. बल्कि यह कहना अधिक तर्कसंगत लगता है कि मौजूदा हुक्मरानों का पुलवामा हमला फायदा कराके रहेगा. सबसे पहली बात तो यह है कि जनता कुछ समय के लिए (हो सकता है हमेशा के लिए) ‘राफेल’ भूल जाएगी. क्योंकि पुलवामा हमले के परिप्रेक्ष्य में माहौल ही ऐसा बनाया जा रहा. अवाम के जेहन से राफेल और उसकी कीमतों को लेकर घोटाले की बू को यह माहौल चट कर देगा.  राफेल की सौदेबाजी को लेकर वैसे भी कैग ने सरकार को क्लीन चिट दे ही रखी है. हालांकि ‘द हिंदू’ जैसे अखबार चीखते हुए बताने की कोशिश कर रहे हैं कि राफेल के सौदे में घपला है. अखबार ने कैग की रिपोर्ट को भी गलत बताते हुए खारिज कर दिया है, पर दहशतगर्दो के हमले ने सरकार का काम आसान कर दिया है. खबरिया चैनलों का ‘सरकार का गोद लिया समूह’ राफेल को भुलाने की कोशिश में जुट गया है. हो सकता है सरकार हमले का ‘मुंह तोड़ जवाब’ देते हुए आनेवाले चंद दिनों में ही एक और सजिर्कल स्ट्राइक करा बैठे. हुक्मरानों के बयानों से ऐसे संकेत मिलने लगे हैं. सजिर्कल स्ट्राइक होते ही चैनलों का समूह ‘पुलवामा हमले का बदला ले लिया..’ शीर्षक वाली खबरें चलाकर और प्रखर राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत नग्मे सुनाकर सरकार की वीरगाथा बताने में मशरूफ हो जाएंगे. राफेल के साथ पुलवामा कांड को भी बिसरा देंगे. यह चैनल लंबा समय सरकार की पीठ थपथपाने में गुजार देंगे. जनमत  ऐसा बना दिया जाएगा कि सरकार ने पाकिस्तान को सबक सिखा दिया है.. शहीदों का इंतकाम ले लिया है.  इसमें सरकार को अपेक्षित वोटों का ध्रुवीकरण भी होकर रहेगा. पाक से नफरत करनेवाले वोट निश्चित रूप से सरकार के पक्ष में चले जाएंगे.  ऐसे में लोकसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान हो जाएगा, आचार संहिता अमल में आएगी और जनता राफेल को भूल जाएगी.  यानी राफेल का तेल निकल जाएगा. मैंने एक ब्लॉग में पढ़ा है कि राफेल के दो विमान भारत पहुंच चुके हैं, जिनका इस्तेमाल सजिर्कल स्ट्राइक में कर उनकी उपयोगिता का बखान करना शुरू कर देगी. लोगों को भी लगेगा कि इतने प्रभावशाली लड़ाकू विमानों का विरोध विपक्ष क्यों कर रहा है.  

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