रजाई..लुगाई..लड़ाई

दफ्तर से देर रात घर लौटा. घड़ी 1.30 बजे का समय दिखा रही थी. ठंड इतनी थी कि रजाई में दुबकते ही नींद के आगोश में चला गया. करीब ढाई बजे नींद टूटी. वजह थी पड़ोसी के घर से आती मियां-बीवी के झगड़े की आवाज. समझ नहीं आ रहा था कि इतने रात क्या तकरार दोनों में चल रही है. शब्दबाण शौहर के जितने तेज थे उतने ही बेगम के भी थे. ‘पति-पत्नी के बीच बातें न सुनें..’ के संस्कार को थोड़े समय के लिए भुलाकर  सुनता रहा तो पता चला कि  झगड़े की वजह दरअसल ‘ठंड’ है, जिससे हजरत का ‘पारा’ चढ़ गया था. तीन दिन पहले ठंड जब कम हुई थी तो पत्न्नी ने रजाई लपेटकर रख दी थी. फिर तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई और अचानक ठंड बढ़ी. पति महोदय ने रजाई निकालने को कहा.रजाई निकालने को लेकर दोनों में तू-तू मैं-मैं हो गई. गुस्से में दोनों ने कंबल में रात गुजारने की सोची. लेकिन ठंड  से परेशान मियां नींद में डूबी लुगाई पर उखड़ गए. नींद खराब करने से खफा लुगाई भी अपने मर्द को खरी-खोटी सुनाती रही. मतलब ठंड ने दोनों की नींद खराब कर डाली..और लड़ाई भी हो गई. सचमुच इस साल ठंड ने मार डाला. 29 दिसंबर 2018 को नागपुर में 3.5 डिग्री सेल्लियस तापमान ने ठंड का 80 साल पुराना रिकॉर्ड ध्वस्त कर डाला. बचपन से बुजुर्गो की बात सुनता था..हमारे बचपन में क्या ठंड होती थी..खून जम जाता था. लेकिन ‘प्रचंड ठंड’ का रिकॉर्ड तो अभी टूटा है. मतलब बुजुर्गो के बचपन में उतनी ठंड नहीं होती थी जो हमारी कौम ने देखी है. नागपुरियंस के लिए 8-9 डिग्री सेल्सियस तक कम तापमान ठीक है. इससे कम तापमान हिला देता है. इस बार तो ठंड ने कहर बरपाया. 3.5, 4.5 डिग्री सेल्सियस पीछा ही नहीं छोड़ रहा. लौट-लौटकर ठंड आ जाती है और फिर घर में निद्रासन अर्धागिनी के साथ ‘फसाद’ के हालात तक बन जाते हैं. प्रकृति देवी अब बहुत हो गया. कृपया ठंड से अब मुक्ति दिलाओ. हमें इतनी सर्दी में रहने की आदत नहीं है. इस बीच एक और खबर मौसम विभाग के हवाले से छपी है. खबर यह है कि इस साल गर्मी भी भीषण पड़नेवाली है. मतलब आनेवाला समय त्रहिमाम का है. वैसे तो तीन महीने बाद होनेवाले लोकसभा चुनाव को देखते हुए राजनीतिक तापमान तो अभी से बढ़ने लगा है. मतलब हमें कुदरत और सियासत के चढ़ते पारे से रू-ब-रू होने के लिए कमर कसनी है.

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