गडकरी कांग्रेस में जा रहे हैं?

 सियासत की थोड़ी सी भी जानकारी रखनेवाला कोई भी बंदा शीर्षक पढ़कर आसमान से गिरेगा. क्या सचमुच नितिन गडकरी भाजपा का परित्याग कर कांग्रेस में जाने पर आमादा हैं? क्या उस राजनीतिक दल से उनका इतना मोहभंग हो चुका है जिसमें उनकी हस्ती बनी? होली में अभी करीब सवा महीना बाकी हैं इसलिए ‘गडकरी के भाजपा छोड़ कांग्रेस में जाने की संभावना’ यानी होली पर छपनेवाली खबर भी नहीं कही जा सकती. वैसे ‘फेक न्यूज’ (फर्जी खबरों)  का बोलबाला खूब है. अमेरिका जैसा सर्वशक्तिमान मुल्क तक ‘फेक न्यूज’ से त्रस्त है. ट्रम्प साहब को समझ नहीं आ रहा है कि फर्जी खबरों के स्रोतों को कैसे खंडित करें. भारत भी फेक न्यूज के मामले में कहां पीछे है. तो क्या गडकरी के भाजपा को टाटा कहने की आशंका भी फर्जी खबर का खेल है. ज्यादा उलझाए रखने के बजाय अब मुद्दे की बात करते हैं. चंद दिनों पहले एक समारोह में एक बड़े राजनेता से मुलाकात हुई. आजकल महाशय ‘खाली-पीली’ हैं लेकिन शर्तिया उन्होंने पी नहीं थी. बात भारतीय राजनीति पर चली तो कहने लगे, ‘देखो नितिन गडकरी कांग्रेस में जा रहे हैं. उनके आजकल के बयानों को, तेवरों को देखो. सब मोदी के खिलाफ हैं.’’ फिर राज की बात उन्होंने बताई, ‘‘गडकरी के जो भी मोदी विरोधी बयान हैं वह उन्हें कांग्रेस से ही तो सप्लाई किए जा रहे हैं. ’’  नेताजी और भी काफी कुछ कहते चले गए.  बहुत सारी बातें बिजली गिरा गईं.
इस सज्जन का सियासी तजुर्बा काफी लंबा है. साढ़े तीन-चार दशकों से वे सक्रिय राजनीति में हैं. उनके व्यक्तिगत राजनीतिक जीवन में कई उतार-चढ़ाव आए, पर पार्टी को नहीं त्यागा. गडकरी के बयानों पर गौर करें तो एहसास हो ही जाता है कि ‘बॉस’ के साथ उनकी जम नहीं रही है. किसी न किसी मोड़ पर रार है.  ‘अच्छे दिन आते नहीं, सिर्फ महसूस किए जा सकते हैं..’ का गडकरी का बयान ‘बॉस’ यानी मोदी पर परोक्ष हमला था. इसके बाद गडकरी गाहे-ब-गाहे बोलते चले गए. कह दिया-‘मैं औरों की तरह सिर्फ वादे नहीं करता, जो पूरे होते हैं वहीं वादे करता हूं. ’ जोर का वार तो तब हुआ जब बोल बैठे, ‘जो घर नहीं संभाल सकता, देश क्या संभालेगा.’ हालांकि गडकरी ने इस बयान को बाद में कांग्रेस पर धकेलकर हाथ झटक लिए लेकिन सवाल यह भी है कि खुलासे में कांग्रेस का नाम लेने के बजाय मुख्य बयान में ही कांग्रेस का नाम क्यों नहीं ले लिया? क्यों देश में बवंडर खड़ा होने की राह देखते रहे?
मुझसे बात करनेवाले नेता का यह भी कहना था कि गडकरी ने पिछले दिनों कई बार राहुल गांधी की तारीफ की थी. प्रियंका के राजनीतिक प्रवेश की सराहना भी की थी. तो क्या गडकरी कांग्रेस का दामन थामने की तैयारी कर रहे हैं? संभव तो नहीं है मगर मोदी के साथ उनका प्रेमभाव विलुप्त हो चला है. 

Comments

  1. हा... हा... हा..! रवींद्र जी, गडकरी अगर कांग्रेस में चले गए तो कुछ दिनों में आरएसएस वाले इतिहास बदल देंगे और कहेंगे कि कांग्रेस की स्थापना हेडगेवार ने की थी.

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