कांग्रेस में ‘तीसरा खानदान’
प्रियंका गांधी वाड्रा का भारतीय सियासत में प्रवेश बिना किसी तामझाम के रहा. उनका आना हालांकि निश्चित था लेकिन जैसा की लोग सोचकर चल रहे थे कि राजीव-सोनिया की पुत्नी बड़े आकर्षक अंदाज में अपनी राजनीतिक पारी शुरू करेंगी वैसा नहीं हुआ. प्रियंका सारे अनुमानों को खारिज करते हुए ‘औपचारिक तौर पर सियासतदां’ बन गईं. अब यहां से एक नई कहानी शुरू होने जा रही है. कहानी की मध्यवर्ती कल्पना ये है कि क्या कांग्रेस की विरासत तीसरे खानदान को हस्तांतरित हो रही है.देश के सबसे पुराने राजनीतिक दल पर आजादी से पहले और बाद में करीब दो दशक तक नेहरू जी का वर्चस्व था. कांग्रेस में नेहरू जी के समकक्ष बनने की कोशिश भी शायद किसी ने नहीं की. नेहरू जी अपनी विरासत इंदिरा गांधी को सौंप गए अर्थात कांग्रेस को संभालने वाले हाथ खानदान के साथ बदल गए. जिस कांग्रेस पर पहले नेहरू जी का वर्चस्व था, वह अब इंदिरा जी के नेतृत्व में चलने लगी. इंदिरा जी की बहू सोनिया गांधी ने भी कांग्रेस का नेतृत्व किया. अब कांग्रेस को संभालने की जिम्मेदारी सोनिया-राजीव गांधी के बेटे राहुल पर आई और अपनी जिम्मेदारी में सफल होते दिख भी रहे थे कि अचानक उनकी बहन प्रियंका को पार्टी महासचिव बना दिया गया. भविष्य के गर्भ में छिपा रहस्य कौन जाने? हो सकता है प्रियंका आगे चलकर पार्टी की अध्यक्ष भी बना दी जाएं क्योंकि उनमें योग्यता राहुल से ज्यादा तो है ही अपनी क्षमता से पार्टी कार्यकताओं को वे प्रभावित करने में भी बीस हैं. मनोविज्ञान में स्नातक तथा बौद्ध दर्शन में स्नातकोत्तर उपाधि प्राप्त प्रियंका अपनी दादी इंदिरा की परछाई लगती हैं. वे यदि पार्टी की कमान थाम लेती हैं तो कांग्रेस का नेतृत्व तीसरे खानदान के पास चला जाएगा..मतलब वाड्रा खानदान और वाड्रा खानदान का कांग्रेस का ‘कप्तान’ बनने के संकेत हैं भी. इसका ताल्लुक राहुल की शादी से है. राहुल की शादी कब होगी, कब उनके बच्चे होंगे (जो भविष्य में पार्टी के काम आएं) जैसे सवाल यानी ब्रrांड में किसी अज्ञात ग्रह की तलाश दूरबीन लगाकर करने जैसा है. कहने का मतलब कि कांग्रेस की कमान पहले नेहरू के पास, फिर गांधी के पाक और अब वाड्रा के पास आ रही है. प्रियंका की बेटी मिराया जबकि बेटा रेहान है. कुछ ही सालों बाद यह दोनों भी कांग्रेस के लिए काम करने लग जाएंगे और पार्टी समर्थक उन्हें भी सिर-आंखों पर बिठाएंगे. राहुल भी अपने भांजा-भांजी को आगे बढ़ाएंगे. सीधी बात है कि कांग्रेस पर वाड्रा खानदान का लेबल चस्पा होते रहेगा और कुछ सालों बाद नेहरू-गांधी की कांग्रेस ‘वाड्रा’ की हो जाएगी.
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